लेखनी कहानी -22-Dec-2022
मंगल ग्रह से जीवन कैसे नष्ट हुआ
दोस्तों आपने कई बार सुना होगा के अगर पृथ्वी के बाद किसी दुसरे ग्रह पर जीवन की कल्पना कि जा सकती है तो वो है मंगल ग्रह हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है के हमारा ब्रम्हांड इतना बडा है तो ऐसा कैसे हो सकता है के वहा सिर्फ पृथ्वी पर जीवन पनपता है जीवन संभव हो उनके अनुसार ब्रम्हांड पर ओर भी ऐसे ग्रह मौजूद है जिस मे जीवन जिया जाता है और वो हमारे जैसे है या नही ये तो नही पता पर वो जीवित अवश्य होंगे। ।
फिलहाल कुछ वैज्ञानिकोंने यह दावा किया है के पृथ्वी पर जीवन मंगल ग्रह से यात्रा करके आया है। इस बात मे कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि मे नही करती लेकिन क्या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था। उसका जीवन कैसे और कब नष्ट हुआ यह सबसे बडा सवाल है। इसलिये आज हम इस विषय पर रोशनी डालेंगे। आखिर कैसे हालात रहे होंगे। जिन्होने मंगल ग्रह को बेजान कर डाला लेकिन पृथ्वी पर जी वन क़ो भेज दिया ये बात तो आप भी जानते हो के सभी ग्रहो का जन्म तारे से होता है और हमारे सौर मंडल के सभी ग्रह भी हमारे सूर्य से ही जन्म लेते है। अब हमारा सुरज सबसे गरम पिंड है।
इसलिए इसमे जन्मे सभी ग्रह गरम होंगे लेकिन ग्रहो के पास खुद से गरमी पैदा करने का कोई जरिया नही था इसलिए उन्होने ठंडा होना शुरु कर दिया।
यह प्रक्रिया करो जो साल तक यु ही चलती रही। मंगल ग्रह है जो कि पृथ्वी से काफी छोटा है। सुरज से भी इसकी दुरी कई ज्यादा है। यही वजह है कि मंगल ग्रह पर करोडो साल पहले ही आदर्श तापमान बन गया था और वहा पर स्वच्छ पानी के सागर बहने लगे थे। अतित मे पानी बहने के सबुत हमारे खो जी यो ने ढुंढ के निकाले है मंगल ग्रह के इन्ही महासागर से सुक्ष्म बँक्टेरिया जन्म लेने लगे और किसी और ग्रह पर जीवन कि शुरआत bacteria के रुप मे ही होती है। जब की बडे जीव बनने के लिये फिर उन्हें लंबा समय तय करना होता है। जब कि मंगल ग्रह पर उन्हें वो समय नही मिला।
इस ग्रह पर एक एक्ट्राइड तेजी से होता हुआ मंगल ग्रह से टकरा गया। जिसे हजारो परमाणु बम के बराबर उस एक्सट्राइड से ऊर्जा निकली और उससे मंगल ग्रह का उपरी हिस्सा समाप्त हो गया इस टकराव से मंगल ग्रह के bacteria अपने आप नष्ट हो गये उसी समय और यह घूमता हुआ अपनी पृथ्वी से टकराया और उससे पृथ्वी के २टुकडे हो गये । यह बात ओर है के उस वक्त पृथ्वी पर कोई और जी वन था ही नही तो उस टक्कर से पृथ्वी के जो टुकड़े हुए उन मेसे एक टुकडे पर हम रहते है और जो बचा दुसरा टुकड़ा उसे हम आज चॉंद कहते है ।
पौराणिक ग्रंथो मे पृथ्वी को चॉंद की बहन माना गया है। इसलिए चंदा को मामा कहा गया है । अतः उस ग्रह से हुई टक्कर एक अच्छा सहयोग था क्योंकि उससे पृथ्वी पर जन्म जिने लायक परिस्थितियां बनने वाली थी।
- अभिलाषा देशपांडे
Sachin dev
22-Dec-2022 05:59 PM
Nice
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Gunjan Kamal
22-Dec-2022 08:22 AM
👏👌
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Mohammed urooj khan
22-Dec-2022 12:50 AM
👌👌👌
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